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उनà¥à¤à¤¾ शंख à¤à¤¸à¥à¤® (Unjha Shankh Bhasma) à¤à¤• पारंपरिक आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• औषधि है जो शà¥à¤¦à¥à¤§ शंख (conch shell) से बनाई जाती है। यह मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से पाचन संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं, पितà¥à¤¤ और वात दोषों को संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ करने के लिठउपयोग की जाती है। मà¥à¤–à¥à¤¯ लाठऔर उपयोग पाचन सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯: यह अपच (indigestion), पेट फूलना (bloating), और गैस की समसà¥à¤¯à¤¾ में राहत पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करती है। à¤à¤¸à¤¿à¤¡à¤¿à¤Ÿà¥€: अपनी कà¥à¤·à¤¾à¤°à¥€à¤¯ (alkaline) पà¥à¤°à¤•ृति के कारण, यह पेट के अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ को बेअसर करती है और हारà¥à¤Ÿà¤¬à¤°à¥à¤¨ (सीने में जलन) और à¤à¤¸à¤¿à¤¡ रिफà¥à¤²à¤•à¥à¤¸ से राहत दिलाती है। कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® का सà¥à¤°à¥‹à¤¤: यह पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® से à¤à¤°à¤ªà¥‚र है, जो हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और दांतों के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठमहतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। अनà¥à¤¯ उपयोग: इसका उपयोग दसà¥à¤¤ (diarrhea), मà¥à¤à¤¹à¤¾à¤¸à¥‡, लिवर और तिलà¥à¤²à¥€ (spleen) से संबंधित विकारों और चिड़चिड़ा आंतà¥à¤° सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® (IBS) के इलाज में à¤à¥€ किया जाता है।
खà¥à¤°à¤¾à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की उमà¥à¤° और सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पर निरà¥à¤à¤° करती है, लेकिन सामानà¥à¤¯ निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶ निमà¥à¤¨ हैं: वयसà¥à¤•: 125 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® से 500 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤®, दिन में à¤à¤• या दो बार। बचà¥à¤šà¥‡: 60 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® से 250 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤®à¥¤ अनà¥à¤ªà¤¾à¤¨ (Adjuvant): इसे आमतौर पर शहद, नींबू का रस, घी या गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ पानी के साथ à¤à¥‹à¤œà¤¨ से पहले या बाद में लिया जाता है। सावधानियां और साइड इफेकà¥à¤Ÿà¥à¤¸ सà¥à¤µ-चिकितà¥à¤¸à¤¾ से बचें: इसे केवल डॉकà¥à¤Ÿà¤° की देखरेख में ही लेना चाहिà¤à¥¤ कबà¥à¤œ: अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में या अकेले लेने पर यह कबà¥à¤œ पैदा कर सकता है。 गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾: गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ या सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली महिलाओं को इसका उपयोग करने से पहले चिकितà¥à¤¸à¤¾ सलाह लेनी चाहिà¤à¥¤ जीठपर पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ: इसे सीधे जीठपर रखने से बचें, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह जीठपर हलà¥à¤•ी दरारें पैदा कर सकता है; इसे हमेशा किसी माधà¥à¤¯à¤® (जैसे शहद) के साथ मिलाकर लें।